कभी शाम को ढलते सूरज को देख
याद आता है हर सुबह एक संध्या को छुपाकर आती है ,
सूरजको देखकर याद आता है ,
कुछ उम्मीदे देकर गया था ,
शाम को पूछता है कुछ हुआ या नहीं ???
कभी हाँ बोल कर सर हिलाते है ,
कभी ख़ामोशी से ना कह देते है ,
फिर एक ढाढस बंधाता है मुझे ,
कल की सुबह कुछ जरूर लेकर आएगी ......
फिर एक ढाढस बंधाता है मुझे ,
जवाब देंहटाएंकल की सुबह कुछ जरूर लेकर आएगी ......
इसी उम्मीद के सहारे ज़िन्दगी गुजर जाती है…………बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति।
बेहतरीन !
जवाब देंहटाएंकल की सुबह पर विश्वास बना रहे , यह आस बनी रहे !
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