तुम पर ऐतबार है
खुद पर इख्तियार है ,
शायद ये कोई खुमार बेशुमार है ?
या फिर ये सिर्फ प्यार है ?
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कहीं मुक्कमल जहाँ की तलाश पर मंजिल है आज ,
वो एक जिसे राह से प्यार हुआ इस कदर उसे मिलने की बेताबी है आज ....
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जुर्म प्यार है या दिल का टूट जाना ...
शायद पुरे एहसास को झुठला देना ये ही एक गुनाह है ना !!!!!!!!!
जिंदगी मेरे लिए ख्वाबोंके बादल पर उड़नेवाली परी है .!! जो हर पल को जोड़ते हुए बनती है, और उन हर पलोंमें छुपी एक जिंदगी होती है ....
10 जनवरी 2011
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