शबनमसी पानीकी चंद बूंदे टपक रही थी झुल्फोंसे,
नाजुक नर्म गालोंसे सरक जा रही थी जैसे बूंदे औसकी पत्तोंसे,
बूंदोकी किस्मतसे जलन हो गई उस वक्त कुछ इस नाचीज दिलको,
नजाकतसे रुबरु हो रही थी वो बेखबर, और हम थे कि आहें भरकर रह गये............
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नजरसे छलकते हुए वह मयके पयमाने थे,
जिन पयमानोंने खुद ही में सागरको समाया था,
उफ ढंक लो पलकोंकी चिलमनसे इस सागरको,
घायल हो चूके है इस कदर, फिर भी जीने की जुत्सजु अभी बाकी है...................
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जिंदगी मेरे लिए ख्वाबोंके बादल पर उड़नेवाली परी है .!! जो हर पल को जोड़ते हुए बनती है, और उन हर पलोंमें छुपी एक जिंदगी होती है ....
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