25 सितंबर 2015

तेरी वापसी

हरकत में आ जाती है दीवारें भी ,
किवाड़ भी होते है खुलने को बेक़रार  …
राहों पर तेरे क़दमों की आहट को
पहचानता है मेरे वजूदसे जुड़ा जर्रा जर्रा  ....
कल रात चाँद भी तकता रहा मुझे ,
तेरे अफसानों को सहलाकर
सुला रहा था तकिये पर  ,
उन्हें फिर मेरी आंखोमे सपने बनकर
आने में कोई परेशानी न हो  ....
मुझे दीवाना कहते है गली मोहल्लेवाले भी  ,
 मोहब्बत को भी दीवानगी का नाम दिया था  …
तू लौटेगी नहीं ये बात गवारा नहीं दिलको  ....
तेरी वो मुड़कर देखने वाली अदामें
वादा पढ़ लिया था मैंने तेरी वापसी का  ....
रोज़ तुझे याद करने पर एक फूल खिलता है सुबह  ,
रातको एक तारा भी जुड़ जाता है फलक पर  .... 

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