24 नवंबर 2014

मुद्दतें हो गई

मुद्दतें हो गई कल रात  जहनमें तेरा नाम याद आया  ,
तुझे भेजा था खत लिख कर  पैगाम याद आया  …
तुम्हारे और मेरे बीच यादोंमे भी दूरिया हो गयी अब ,
कहाँ से चले थे कहाँ पहुंचे है हम वो वक्त गुजरा याद आया  …
आज कोई और है मेरे पास  ,
आज कोई है मेरा खास  .
तेरी याद भुलाने के लिए वो खुद को भी भूल गया  ,
उसने किया जिक्र तुम्हारा इसी लिए तू याद आया  …
क्या कहूँ इसे तुम्हारी मज़बूरी या बेवफाई ,
तुम्हारी यादो में कभी वो एहसास न आया  …
मज़बूरी कभी बेवफाई करने को मजबूर कर देती होगी  ,
लो आज पता चला और ये इल्ज़ाम मिटाने का काम याद आया  …

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