15 नवंबर 2014

इल्तज़ा

आज फिर वो ही बात है ,
बस तुम्हे याद दिलानी है  .
मौसमने ली अंगड़ाई है ,
बस तुम्हे फिर भीगना है  …
वो सड़कें फिर भीगी एक बार  ,
बस तुम्हे उस पर चलना है  ,
हर किवाड़ पर दस्तक दे चुके हम ,
बस तुम्हारे दिल की किवाड़ को खोजना है  .
तुम्हारी याददाश्त कमजोर हो गयी है अब  ,
बस उसे एक बार फिर दोहराना है   रिश्ते को …
तुम्हे तो हर निवाले पर याद करते है हम  ,
तुम्हे वो ज़ुर्रियां वाले हाथ महसूस करवाना है  .
खुश रहो आबाद रहो जहाँ नयी दुनिया है तेरी  ,
बस आखरी सांस पर इस बेबस माँ को  ,
तुम्हारे कंधे पर चढ़ कर जाना है  ……

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