15 नवंबर 2013

वक्त नामकी नदी

वक्त नामकी नदी  किनारे खड़े है हम ,
और दिल बह रहा है धारा में ,
खामोश खड़े हम देखते रहे।
चुपचाप खड़े किनारो को नि:शब्द  ………
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एक जिंदगी में कितनी जिंदगी जीते है ,
कितने रिश्तों के चोले बदलते है हम ????
एक साथ इतना उठाकर चल देते है बेखबर ,
खुद के अस्तित्व को इसमें दफन करते है लोग  ……
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कुछ मौत ऐसी भी होती है दुनिया में ,
नब्ज़ चलती है ,दिलकी धड़कन भी ठीक ,
बस रूह को कतरे कतरे काट दिया जाता है ,
और बेजान रूह कैद रहती है उस जिस्ममें  …… 

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