12 नवंबर 2013

बस फिर वही

बस यूँही गुस्ताखियां ,
बस फिर वही शोखियां ,
बस फिर वही शरारतें ,
बस फिर वही दिन की अंगड़ाइयाँ ,
बस फिर वही रात भर साथ चलती तन्हाइयाँ ,
बस फिर वही नदी की बालू पर पैरों के निशाँ ,
बस फिर वही बिना बात मुस्कुरा देना ,
बस फिर वही अनायास पलकें भीग जाना ,
बस फिर वही खिड़की से आसमानों पर तकना ,
बस फिर वही किवाड़ पर दस्तक होने का भ्रम ,
बस फिर वही रातोंमें सितारों को एकटूक तकना ,
बस फिर वही गली के नुक्कड़ तक जाकर मुड़ जाना ,
ये सारे काफिले गुजरते है बस तेरी याद की गलियोंसे   ....... !!!!!!

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