11 नवंबर 2013

एक एक पल

एक एक पल करके अपने  दामनमें
समेट कर पुरे साल को वक्त ले चला  …
मेरे जीवनमें कुछ खुशियां कुछ गम देकर चला गया  …
क्या सोचु बैठकर में ???
मेरे घाव को भरने के मरहमसे बेमुर्रावत
एक नासूर बनाकर चला गया  ....
जीवनमें जोड़कर चलता रहा उन लम्होंको ,
जैसे खुशियों को निचोड़कर गमके निशाँ छोड़ता चला गया  …
नाउम्मीदी कैसे करे हम ???
अभी रात का आखरी पहर है यहाँ ,
सूरजके उजालेमें रातका लम्हा छटपटाता चला गया   ....... 

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