15 सितंबर 2013

क्या रिश्ता है तेरा मेरा ?????

कांच सी नाजुक ये जिंदगी
बस कभी कभी ताज्जुब कर जाती है ,
क्या होता है कुछ ऐसा कि ,
वो पत्थर से टकरा कर भी साबूत ही रह जाती है ??!!!!
कभी फौलाद से भी मजबूत मन
यूँ बेबसी के आलम से होकर गुजरता है ,
आंसू जलती मोमबत्तीकी तरह बिखर जाते है ???!!!
अय जिंदगी तुम और मैं साथ चलते है ,
एक ही राह पर दो किनारे पर ,
फिर भी ठोकर लगते हर वक्त  …. हर वक्त  …
तू ही मेरी बाहें थाम कर मुझे संभालती है ???!!!!
दुश्मनोंसे सलूक किये है मेरे साथ हरदम ,
पर फ़र्ज़ तूने निभाए सच्चे दोस्त बन कर  क्यों ????
क्या रिश्ता है तेरा मेरा ?????

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा कल सोमवार [16.09.2013]
    चर्चामंच 1370 पर
    कृपया पधार कर अनुग्रहित करें
    सादर
    सरिता भाटिया

    उत्तर देंहटाएं
  2. बढ़िया व्याख्या रिश्ते की इस रचना में
    "आंसू जलती मोम बत्ती की तरह बिखर जाते हैं "बहुत सुन्दर |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...