12 अगस्त 2013

वही तू सबसे पायेगा …….

खरोंचते है उन जख्मोंको नाखूनोंसे अपने ,
उम्मीद लगाये की चलो इससे फिर खून रिसेगा  …
अभी तो जख्म भरे थे ,
अभी तो हलकीथी मुस्कान आकर गयी थी ,
फिर रास न आई और इंसानी दिमागमे
शैतानियत एक बार लहू बहाने बेताब हुई  …
न कोई सुकून है इस इनाम अकरामो की जूठी रिवायतसे ,
न कोई खफगी ही है हमारी बदनामियोंसे ……
ए इंसान तुझे तो लगा हर इंसान निकम्मा तेरी नज़रसे ,
बस सिर्फ एक बार तो सोच तू कितनो के काम आया ,
बदनाम करता रहा है तू जिस जिस को गली गली ,
तू इससे क्या नाम कर पाया है ???
तेरे दीदार से भी लोग बदल देंगे रास्ता अपना ,
तुझसे नजर कतराते हुए निकल जायेंगे ,
येही शायद सिला होगा तेरे करम नवाजिश होगी ,
कहते है देता है जो दूसरोंको वही तू सबसे पायेगा  ……. 

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह रचना कल मंगलवार (12-08-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

    उत्तर देंहटाएं
  2. कहते है देता है जो दूसरोंको वही तू सबसे पायेगा ……

    आमीन ।

    उत्तर देंहटाएं

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...