10 जुलाई 2013

बहाना किया !!

तिल तिल कर जलती है लौ इस दिलमे
राख सहेजे बैठी थी तेरी यादो की ,
बस एक हवा का झोका आया और ,
दूर उड़ गयी वो यादें दिल में एक तस्वीर रख तुम्हारी ...!!!!
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वो वतन की धुलकी महक की तलाश क्यों ?
हम ही हमारी मर्जी से परदेस जो जा बसे थे ???!!!
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ना कोई हवा थी ,न कोई फिज़ा का जिक्र ,
न कोई खबर थी तुम्हारी ,फिर भी मुझे हरदम तुम्हारी फ़िक्र ..!!!
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बस यूँही कागज़ लिया ,कलमसे कुछ लिखने का बहाना किया !!
यादों की तस्वीरें बैठती रही पलकों पर ,पर किसीने कागज़ का रुख न किया ...!!!

1 टिप्पणी:

  1. खुबसूरत अहसास और अच्छे अल्फाज़ संजोय हो

    पधारिये और बताईये  निशब्द

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