28 जून 2013

सोलहवा साल...

मेरी हथेलीमें कोई मेघधनुष लिख गया ,
प्यारेसे  पैगाममें कोई एक खुशबु छोड़ गया ...
========================================
बादलों पर लिखे मेघदूतको पढनेकी
कोशिश करते करते शाम ढल जाती है ...
========================================
एक एक शब्द गिर रहे थे बादलके प्रेमपत्रसे बूंद बन बन ,
मैंने हथेली धरकर उसमे एक तालाब सजा लिया ...
अब इस मेघदूतके कुछ पन्नो से मैंने भी
एक गिलास भर कर जैसे पैगाम प्रियतमका पी लिया ...
========================================
वो हरे हरे पत्ते की बांधनी पहनकर इठलाकर चली है धरती ,
लगता है हर साल कि  सोलहवा  साल अभी  लगा है शायद ...

2 टिप्‍पणियां:

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...