30 नवंबर 2012

भगवानने आकर मुझसे कहा

एक दिन भगवानने आकर मुझसे कहा ,
बस तेरे पास अब बारह घंटे बाकी है ..
तेरी जिंदगीके ...जी ले जो तेरी आरजू हो ,
पूरी हो जायेगी जो तू चाहे ....
मैंने मुस्कुरा दिया ....
बस जो भी कर रही थी वो करती रही ...
भगवानको लगा मैंने उनकी बात को
कोई तवज्जो नहीं दी .....
ग्यारह घंटे के बाद वो फिर मेरे पास आये ,
मुझसे कहा मैं तुम्हे फिर एक पूरा दिन देना चाहता हूँ ,
अभी भी जी ले जैसे तू चाहे ....
मैंने कहा उन्हें ...
जानती हूँ भगवान मेरे होते हुए भी
दुनिया ऐसे ही जीती है जैसा वो चाहती है ,
मेरे बाद भी वैसे ही जियेगी जैसे जी आ रही है ,
कुछ नहीं बदलेगा इसमें ...सिर्फ मैं ही नहीं होउंगी ,
और धीरे धीरे सिर्फ यादोंके दायरेमें कैद हो जाउंगी ....
लेकिन ...अगर आप मुझे इस लिए दो बार मिलने आये ,
उससे बढ़िया किस्मत क्या हो सकती है ,
जो बरसों की तपश्चर्या के बाद भी न होता है ,
वो आपके दीदार मुझे निस्पृह होने पर मिल गए ....
चलो आपका हाथ थामे आपके साथ ही ले चलो ........

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (1-12-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  2. जानती हूँ भगवान मेरे होते हुए भी
    दुनिया ऐसे ही जीती है जैसा वो चाहती है ,
    मेरे बाद भी वैसे ही जियेगी जैसे जी आ रही है ,
    बहुत ही सच्ची बात कही।



    सुन्दर प्रस्तुती :)


    आपके ब्लॉग पर आकर बहुत अच्छा लगा ..अगर आपको भी अच्छा लगे तो मेरे ब्लॉग से भी जुड़े।

    आभार!!

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. यह प्रस्तुति बहुत सुंदर है, हमारे बिना जीवन नहीं ठहरता ?

      हटाएं
  3. सुंदर रचना जिंदगी का फलसफ़ा ।

    उत्तर देंहटाएं

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...