13 जुलाई 2012

रुमाल पर दाग

बस एक अनछुआ एहसास कागज़   पर दाग बनकर चमक रहा था ,
मुझे उसमे मेरे अरमानका एक सूरज नजर आया था ...
बस रौशनी ही रोशनी दम ब दम ....
एक छोटा सा पल
जिसमे एक पूरी कहानी लिखी थी ,
उसकी यादोंकी ,उसके वादोंकी ,
उसके रूठने की ,उसके मनानेकी ,
उस हर पल जब हम साथ थे ,
उस हर पल जिसमे हम जुदा थे ...
उस हर पल का हिसाब लेकर आया था एक छोटासा दाग ,
वो दाग जो मेरे इश्कको सजाकर बैठा था ,
मेरे मनकी  कांचकी खिड़की पर ......
जिसे सहलाना नहीं है ,
शायद मेरी ऊँगलीसे वो दाग मिट जाए !!!!
उसे चूमने की भी खता नहीं करनी ,
शायद वो मिट जाए !!!!!!
वो दाग जो स्याहीकी फैलाकर
ख़त लिखते वक्त तुम्हारे आंसूने बनाया था !!!!

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही खुबसूरत ख्यालो से रची रचना......

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    1. ज़िन्दगी के कुछ पल कभी हमारे जेहेन से नहीं भुलाये भूलते !! बड़े ही हसीन शब्द है ये ....

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