24 जून 2012

चल रही थी जिंदगी ,

करेलेकी कड़वाहट लिए चल रही थी जिंदगी ,
तुम उसमे शहदकी मिठाश लिए आये हो ,
बुझे चूलेकी राखमें सुस्ता रही थी चिंगारियां ,
तुम उसमे एक आतिश बनकर आये हो ,
मटरके दानेसी लुढ़क रही थी ये जिंदगी ,
तुम आलूसी दोस्ती निभाने आये हो ...
पनीरसी नर्म नर्म बेदाग स्निग्धसे चोकोरमें ,
कला नमक और लालमिर्चका स्वाद बनकर आये हो ......
जब जब मेरी जिंदगी बन गयी लौकीके सूपसी फीकी ,
तुम उसमे काली मिर्च और नमक बनकर आये हो ...
बेरंगसी चावलके दानेसी उबली उस जिंदगीमें ,
तुम फ्रेंच बीन्स ,गाजर ,केप्सिकम ,धनिया  मटरकी फ़ौज लेकर
उसे बिरियानी बनाने आये हो .........
जब प्याजकी परत बनकर छिलते रुलाती है जिंदगी ,
तुम मसाला खिचड़ी बनकर हमें सहलाये हो ....
हरी मिर्चसी सी सी सी करती नचाती है जिंदगी ,
तुम आइसक्रीम बनकर ठंडक दिलाये हो ....
क्या करे मेरी जमुनिया तुम हमें प्रेम पत्र लिखने बोले तो
रसोईघर के हेड बावर्चीसे तुम और क्या तारीफके लब्ज़ पा सके हो ???!!!!

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