13 अप्रैल 2012

मैं तुम्हारी प्रियतमा !!!

चलो आज मैं अपनी हथेलीसे तुम्हारी आँखे बंद करू ???
मुझे शर्म आती है जब तुम मुझे एकटुक देखते हो !!!
मैं तुम्हारी प्रियतमा !!!
जिसे मिलने तुम हर रोज एक ख्वाब लेकर आते हो ,
जिसे देखनेके लिए तुम चांदको आयना बनाते हो ,
जिसे पाना तुम्हारे लहूमें ख्वाहिश बनकर दौड़ती रहेगी ,
जिसकी आवाज ख़ामोशीमें  सूर बनकर गूंजती है ,
जिसकी आवाज शोरमें ख़ामोशी बनकर साथ चलती है ,
जिसका ये रेशमी रुमाल तुम्हारा नाम लिखा हुआ साथ रखते हो ,
जिसके लिए लिए हुए ज़ुमके तुम होठोसे चुमते हो ,
जिसको देना चाहते हो तुम ज़माने भरकी खुशियाँ ,
जिसके सारे गमके रस्तेमें दीवार बनकर खड़े हो जाते हो ,
जिसे दिलकी धड़कन बनाकर सजा रहा है तुमने ,
जिसकी साँसोंमें तुम अरमान बनकर बसे हुए हो ,
जिसके साथ पूरी जिंदगी गुजारनेकी गुजारिश करते हो खुदासे ,
जिसके लिए तुम्हारा इश्क बंदगीसे कम नहीं ,
जिसके सजदेमें जुक जाता है तुम्हारा वजूद खुद खुदा बनकर ....
वो ही तुम्हारी प्रियतमा हूँ मैं ......
तुम्हारा गहरी नींदमें बिखरी हुई उस लटको सुल्ज़ाकर 
तुम्हारे चेहरे को चूमकर लौट जाउंगी ......

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...