19 मार्च 2012

ढेर सारे सपने...

आँखोंमें ढेर सारे सपने ,
दिलमे अरमानोंका बवंडर लिए
दर ब दर घूमते रहे हम ,
बस तेरे दीदारकी एक आस लिए .......
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कहने को तो होगा तुम्हारे पास भी बहुत कुछ ,
बस अफसाना इकरार का लब्जोंकी देहलीज़ पर रुका होगा ,
नहीं ये भी ज्यादती हम कर नहीं पाएंगे ,
शायद वो इनकार हो तो सांस का उसी दम रुकना होगा ......
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डरते है तुम्हारे बे इन्तेहाँ प्यारके तूफानमें
एक तिनकेसे बन बह निकले कहीं ,न पता हो न ठिकाना कोई ...
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हमें इश्क करनेसे हरदम डर लगा है ,
जहाँ दिल टूटनेके घावका मरहम नहीं बना कोई ....
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तेरे इश्कको कामियाबीकी मंजिल मिल गयी ,
हम तो साहिल पर मौजोंको देखते रह गए
जो हमारे अरमानोको संग ले जा रही थी ,
तब  हम अपनी नकामियाबीका जश्न मनानेमें मशरूफ थे ...

1 टिप्पणी:

  1. कहने को तो होगा तुम्हारे पास भी बहुत कुछ
    बस अफसाना इकरार का लब्जोंकी देहलीज़ पर रुका होगा..
    बहुत ही खुबसूरत ..

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