7 मार्च 2012

सर्रर्र.... सर्रर्र.... सर्रर्र.....

सर्रर्र.... सर्रर्र.... सर्रर्र.....
रंगोंकी बौछार लिए है होरी का त्यौहार
पिचकारी रंग बरसायो है जो
मुझे लगे तीरोंसे घाव .....
मत मारो पिचकारी मोहे
मोरी कोरी चुनर भीग जायो रे
न कछु भाए मोहे
न रंग मुझे सुहाए  रे  ...
कासे जाकर मोरी पीर सुनाये ??
काहे  ये लाल रंग भी फीको बन जायो रे ???
मोरा पिया ....
मोरा पिया ....
न बोलत है मुझसे तो फिर ये काहे होली भावत रे !!??
रूठना उसका न बोले कछु
मोरे करजवा पर कटारी चलायो रे ...
अरिरिरिरिरिरिरी ....
ये कैसन भीग गयी मोरी चुनरवा ??
ये कौनो रंगोंकी बरखा कर गयो ???
अरी अरी अरी ...
मोरा पिया ही आकर पीछे से
मोरी धानी चुनरवा लाल रंग गयो रे ....
लाज का रंग बिना गुलाल
मेरे चहेरे को लाल लाल कर गयो रे !!!
बैरी सजनवा मुझे मनाने दूर देससे
आज होरी खेलन को आयो रे !!!!!

2 टिप्‍पणियां:

  1. बेहद खूबसूरत रंगमयी प्रस्तुति………… होली की हार्दिक शुभकामनाएँ !

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  2. बहुत ही खुबसूरत रंगों से भरा हो आपका होली का त्यौहार.....

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