15 फ़रवरी 2012

कोई कोई एहसास

कोई कोई एहसास खास नहीं होता ,
जब कोई किसीके पास नहीं होता ...
एक तन्हाईके आलममें कुछ पल होते है
बिखरे बिखरे जो मुझे समेटे रखते है ......
मेरी यादोंके हर पन्ने पर
उसके दस्तखत है ,
मेरी यादोंकी हर खिड़की पर
उसकी यादोंके पहरे है .....
मेरी यादोंके दरवाजे पर
हर वक्त उसके दस्तककी आहट भी है .....
मेरी यादोंके सारे साजोसामान पर 
उसके स्पर्शकी यादें है ....
आँखोंमें इंतज़ार है उस परदेसी का ,
जो मुझे अलविदा कहकर चला गया
मुझसे कहीं दूर...दूर ...दूर ....
बस एक सवाल छोड़कर मेरे लिए :
क्या उसे भी मेरे साथ गुजरे लम्हे याद आते होंगे ?????

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