16 सितंबर 2011

बचपन

मेरी एक मासूम दुआ जो कुबूल हो गयी ,
लगा खुदाने मेरा वजूद कुबूल किया ....
अय खुदा आज तेरे सज़देमें झुका दिया मैंने अपना गुमाँ.....
बस मेरा कोई अपना मेरा कोई खास 
दूर दूर परदेससे जिसने मुझे बड़ी शिद्दतसे याद किया ...
क्या बताऊँ किसीको वो लम्हे
 जिसमे रातकी सितारोंकी  रौशनीमें 
मैंने अपना पूरा बचपन खूब जी लिया ....

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