17 जुलाई 2011

आज फिर एक बार ...

आज एक झोंका आया तेज हवा का और सब कुछ उड़ाकर ले चला ,

मेरी यादोंके सारे बवंडर ,उसके पहलुमें उड़ गए ,

चलो आज फिर जिंदगी हलकी फुलकी सी हो गयी ,

चलो आज फिर जिंदगीके नए मौजू की तलाश शुरू हो गयी .....

मुमकिन है ये मुश्किल नहीं मेरे लिए ,

ढह गए अरमानोंके खंडहर को कई बार फिर संवारा है मैंने ,

शायद उसके बनने पर खुद की चुक नज़र आ गयी कहीं पर ,

खुदके हाथोंसे गिराकर फिर नयी तस्वीर उभारी हमने ............


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