22 मार्च 2011

वादा किया है उसने ...

बस एक बार फिर चाँद .....
====================
एक सफा है सफ़ेद एक एक टुकड़ा जुड़कर बनता है ,
एक गोल माँ के हाथ की रोटी सा ,
थोड़ीसी कथ्थई लकीरोंसे सजा संवारा हुआ ....
जब पूरा गोल बनता है ,
अपनी ठंडी छुरीसे ये प्रेमियोंके दिलों पर छुरी चलाता है ,
उन बारीक़ एहसासोंकी गुथ्थियाँ उलज़ाता है ,
जगती आँखोंके लाल लकीरोंमें उभरती है जो
उसकी धुंधली तस्वीरसे गुफ्तगू करते एक और रात गुजर गयी ,
चुप रहने की कसम थी पर छलकती चांदनी
कुछ कानोंमें भर गयी ....
धीरे धीरे चाँद का गोल टुकड़ा धीरे धीरे बहने लगा ,
थोडा थोडा करके घटने लगा ,
अब वो तनहाई की रात आ गयी ,
फिर उसके इंतज़ार की बात आ गयी ....
ठहरी हूँ यहीं पर एकटक तकते आसमां को रात में ,
उसने फिर आने का वादा जो किया है ...

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...