3 मार्च 2011

बहुत प्यार करते है तुम्हे ...

तुम्हारे हर इलज़ाम सर आँखों पर ,
तुम्हारे हर गिले शिकवे भी सर आँखों पर ,
तुम्हे टुकडोमें नहीं पाने की चाहत रही मेरी ,
तुमसे ही प्यार करते है और बिठाया है दिलमें ....
तुम्हारी मंजिल अब होगी मेरी मंजिल ही ,
तुम्हारी हर ख्वाहिश को रखेंगे सर आँखों पर ,
हमारी ख़ुशी तुम्हारे नाम करते जायेंगे ,
तुम्हारे सारे गम दे दो मुझे अबसे ,
क्योंकि ये तुम्हारे है ये सारे गम भी सर आँखों पर ........

1 टिप्पणी:

  1. priya priti ji

    jabki anubhutiyan aapki hain ,rachnayen
    sabke liye hain .padha man vibhor ho gaya . saras
    prabhavkari bhav .bahut sundar. dhanyavad ji .

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