1 मार्च 2011

तुम मिले तो लगा

तुम मिले तो लगा
जैसे अँधेरी रात को शमा मेहरबान हुई ....
तुम मिले तो लगा
जैसे एक पंछी को उड़ने की आस मिली ....
तुम मिले तो लगा
मेरे सपनोको पंखो की परवाज मिली ....
तुम मिले तो लगा
मेरी खोई आवाज मिली ....
तुम मिले तो लगा
आवाज को नयी अल्फाजोंकी चुनर मिली .....
तुम मिले तो लगा
तुम मिल गए तो और कुछ नहीं चाहिए ,
खुदा के दरवाजे मेरी दुआ कुबूल हुई .........

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