6 फ़रवरी 2011

जाम ए जहर ....

ये जाम ए जहर है इश्कका
बस खुमार ऐसा की जो पी ले वो जी ले ....
मर कर भी किसी पर रूह को सुकून कहाँ ?
विसाले यार कर के ही दो पल में पूरी जिंदगी जी ले ...
इश्क कोई जवानी या कोई उम्र का मोहताज नहीं ,
बस नज़र के वार पर घायल हो जाए कोई
और मर कर किसी पर जी ले कभी ...
लुफ्त जिंदगीका हमें कहाँ पता था ,
वो यार का दीदार था या दीदार ए खुदा था ,
बस सजदे में सर झुक गया उसके हमारा ,
हमने उसे बंदगी कहा या इबादत ए इश्क ....
खुदा का दूसरा नाम ही प्यार है इस जहाँमें ,
मरकर जी लूँ कभी यहाँ मैं भी ,
ये ख्वाहिश हर सांसका हरदम पयगाम मिला है ....

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