18 नवंबर 2010

फिर चाँद निकला

छलका चाँद आसमांसे
चांदनी की बूंद टपक रही
रात के चेहरे पर
जैसे औस पंखुड़ीसे फूलकी ....
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रातसे इश्क कर बैठा चाँद
रश्क था रात को भी
हाथ में हाथ थामकर दोनों चलते रहे ..
सूरजकी पहली किरणने रातको निगल लिया ...
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चाँदसे वफ़ाकी रस्म निभाने
रातकी वापसी पर चाँदको ऐतबार है ....
फिर चाहे चाँद आये ना आये
हर सांजकी जुल्फोंके सायेमें रात आती है गुपचुप ....

2 टिप्‍पणियां:

  1. pritiji !

    vadodra me mr manik mrigesh ko maine aapke baare me bataya tha ki aap vadodra me rahti hain aur bahut achhi kavyitri hain, ve aapko ek kavi-sammelan me bulana chahte hain lekin mere paas aapka koi contact number nahin hai isliye ya toh aap mujhe apna tel./mobile no. 9408329393 par sms karden ya mr. manik mrigesh ji se 99090 19951 par baat kar len - manik mrigesh ji indian oil - vadodra me sevarat hain

    -albela khatri

    उत्तर देंहटाएं
  2. albelajee meri hausala afjaayi ke liye bahut bahut shukriya ...main aaj sham tak aapko mera nambar s m s kar dungi...

    उत्तर देंहटाएं

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