एक बूंद के पीछे छुपा हुआ बादल
बादल के पीछे छुपा एक आसमां
आसमांमें छुपा हुआ रौशनी के पीछे एक चाँद ...
और चाँदमें नज़र आती है हमें तुम्हारी सूरत .....
सपने बनकर सिमटती हुई आँखोंमें रातको
दिन की धुप में ओज़ल हो जाती है .....
अय मेरी सुबह तु आकर क्यों ठहर नहीं जाती है ....
पास बैठेंगे ,गुफ्तगू करेंगे ...
भाप उठते चायके कपकी धुंधमें तुम्हारे चेहरे की किताबके
ये मासूम अफसाने पढेंगे ....
जिंदगी मेरे लिए ख्वाबोंके बादल पर उड़नेवाली परी है .!! जो हर पल को जोड़ते हुए बनती है, और उन हर पलोंमें छुपी एक जिंदगी होती है ....
23 नवंबर 2010
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