एक पतले कांचका गिलास था हम दोनों के दरम्यां ........
उस पार आप इस पार हम ......
बस एक ही जरिया एक दूजे को देखना ....
निगाहें बहुत कुछ शब्दोंको समेटकर बैठी थी ...
पढ़ रहे थे ...
महसूस ना कर पाए उसकी शिद्दत हम ....
एक हाथसे गिलास तोड़ दिया ...
किरचें चुभी ...
खून बहने लगा ..टीप टीप बुँदे गिरने लगी उनके दुपट्टे पर .....
नए गुलाबी दुपट्टे का कोना फाड़ कर
मेरे घाव पर पट्टी बांध दी ...
चुप चाप ऊँगली को चूमा और चले गए .......
जिंदगी मेरे लिए ख्वाबोंके बादल पर उड़नेवाली परी है .!! जो हर पल को जोड़ते हुए बनती है, और उन हर पलोंमें छुपी एक जिंदगी होती है ....
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बहुत सुन्दर भाव भरे हैं।
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