23 अक्तूबर 2010

हाइकु : चाँद

चाँद तश्तरी
दूध भरा तालाब
डूब जाए यूँ .....
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चाँद दुल्हन
शर्माती है रातोंमें
अकेली यूँ ही ....
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चाँद कंगन
पहन कर खुश
पागल रात .....
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बिंदिया चाँद
सजा गयी चेहरा
घूँघटमें हँसी .....
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खुबसूरत
कौन है ? चाँद या
महबूबा है ?
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नशीले जाम
रात भरके लायी
चांदनी नशा .....

4 टिप्‍पणियां:

  1. नन्‍हीं पंक्तियों में गहरे अर्थ...बधाई

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  2. प्रीति जी आपके हाइकु बहुत अच्छे हैं । चौथे में एक वर्ण अधिक है । कृपया कभी http://hindihaiku.wordpress.com/ के लिए भी कुछ हाइकु भेजिएगा ।रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

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  3. प्रीति जी आपके हाइकु बहुत अच्छे हैं । चौथे में एक वर्कृण अधिक है । कृपया कभी http://hindihaiku.wordpress.com/ के लिए भी कुछ हाइकु भेजिएगा ्।रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

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