19 अक्तूबर 2010

हाइकु : दिल

दिल तो दिल
धड़के तो जिंदगी
बंद तो मौत .....
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दिल बेजुबां
अनकही दास्तान
आँखों से बयां
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टूट जाता है
आवाज नहीं आती
आंसू आते है ....
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ख़ुशीमें डोले
धड़कन चीखती
बोलती रही .....
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कांच का घर
नजाकत है हुस्न
शीशेसा साफ़
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दिल खिलौना
कभी किसीने खेला
तोड़ भी दिया ....
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जुबाँ जूठी है
दिल को नहीं आती
जूठी नौटंकी
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मर्द का सख्त
औरत का कोमल
दो रूप है दोनोंके ....
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दिल क्या कहे ?
धड़कन की जुबाँ
दिल समजे ......
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