10 अक्तूबर 2010

तोहफा

तनहाईकी गली से गुजर कर देखा तो बहुत थे वीराने
वीरानोके बीच सूखे पत्ते से थे उड़ाते हुए कुछ अफ़साने
अफ़सानेके सफों पर उठाकर देखा तो
तेरा और मेरा नाम लिखा था ...
कुछ पहचाना कुछ अनजानासा पयगाम लिखा था ...
ये सफे पता नहीं किस किताबसे उड़कर बिखरे है ???
पर इनसे मुझे पता चला
कोई मोहब्बत जाया नहीं जाती है ...
दिलकी कलमसे लिखा हर खामोश अफसाना
कह जाता है बहुत कुछ जो अनकहा भी रहा हो ....
उठाकर उस पत्ते को मेरे साथ ले आया
सबसे कीमती तोहफा मुझे मिला
आज मेरे नए जन्मदिन पर ......

6 टिप्‍पणियां:

  1. पर इनसे मुझे पता चला
    कोई मोहब्बत जाया नहीं जाती है ...
    बहुत खूब
    वाकई खूबसूरत तोहफा ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (11/10/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी......आपको फॉलो कर रहा हूँ |

    कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुंदर प्रस्तुति....

    नवरात्रि की आप को बहुत बहुत शुभकामनाएँ ।जय माता दी

    उत्तर देंहटाएं
  5. कह जाता है बहुत कुछ जो अनकहा भी रहा हो ....
    उठाकर उस पत्ते को मेरे साथ ले आया
    सबसे कीमती तोहफा मुझे मिला
    आज मेरे नए जन्मदिन पर

    बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत नाजुक भावों को दर्शाती रचना |बधाई
    आशा

    उत्तर देंहटाएं

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