6 सितंबर 2010

याद आती हो ...

कभी चुप रहकर
कभी बोल कर खूब सताती हो ,
फिर भी जाने के बाद
तुम ही तुम याद आती हो ......
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तुम्हारे ख्याल से उठती है सौंधीसी सुगंध
मेरा जर्रा जर्रा महक जाता है .....
बस तुम्हारी दूरी का ख्याल
मुझे अधखिली कली सा कुम्हला देता है ...

11 टिप्‍पणियां:

  1. कभी चुप रहकर
    कभी बोल कर खूब सताती हो ,
    फिर भी जाने के बाद
    तुम ही तुम याद आती हो ......

    सुंदर पंक्तियां....

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  2. बहुत खूबसूरत रचना.... बहुत ही बेहतरीन.

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  3. आप अच्छा लिख रही हैं.. दोनों विधाओं में बढ़िया पकड़ है..

    उत्तर देंहटाएं

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