15 अगस्त 2010

भारत मा का सपना

आज़ादीके चौसठवे जन्मदिन पर
भारतमा अपने ही हाथो कुछ ऐसे आज़ादी पाई है ...

एक देशभक्त हेकरकी मददसे
हालातोंमें कुछ ऐसे बदलाव लायी है ...

स्विस बेंकसे सारा काला धन बड़े लोगोका पासवर्डसे निकालकर
देशका सारा विदेशी कर्जा खुदने ही चूका दिया ...

धर्मस्थानोमें जमा सारी राशीको धर्मके ठेकेदारोंने ही
पुरे देशको पाठशाला और अस्पतालोंसे सुसज्ज करने में ही खर्च किया ....


भ्रष्ट नेताओंको सत्ताधारी अधिकारीओ ने ही बेख़ौफ़ होकर कैद कर लिया
कोई छुट ना पाया सच्चे इल्जामोंसे और सही न्याय किया गया ...

देशके नेताओके दिमागमें देशभक्ति का वायरस हलचल मचा गया
सारे बकाया काम देशके पुरे करते हुए देश को प्रगति राह चलता किया ....

साठगाँठ टूटी आतंकवादीसे जब देश के गद्दारोंकी
अमन की सांस ले चला देश वासी उम्मीदे जगी एक विकास के राह की ...

दो रुपये किलो आलू और चीनी चार रूपये बिकने लगी
देशकी जवानी अब सायकल चलाकर पर्यावरणके बचाव के लिए लग गयी ...

देखो सशक्त युवाधनने क्या कमाल दिखाया है ,
हर खेलोमें सबसे ऊपर तिरंगे को ही फहराया है ...

चलो इस वायरस का हम खुद ही जतन करने लग जाए ,
अपनी बदनसीबीको अपने हाथो ही मिटा कर भारतमा का सपना साकार करे ...

2 टिप्‍पणियां:

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