28 जुलाई 2010

ख़ामोशी ....एक लहर ...

दिल टूट गया ख़ामोशीसे
किरचे चुभी जब नंगे पाँवमें
लहू के कतरे बहे कुछ
तब जाकर पता
ना वजह पता चली
ना पता चला ये कौन तोड़कर चला गया ???
पर एक हलकी सी मुस्कान लहरा गयी
देखो कितने सारे दिल बिखरे है फर्श पर
जो कभी एक ही हुआ करते थे ...

4 टिप्‍पणियां:

  1. देखो कितने सारे दिल बिखरे है फर्श पर
    जो कभी एक ही हुआ करते थे ...

    अत्यंत सुन्दर पंक्तियाँ ... सुन्दर रचना ,,,आके ब्लॉग की यात्रा पहली बार की ...अच्छा लगा !,,,समय निकालकर पर पिछली रचनाएँ भी पढता हूँ ,,,शब्दों के इस सुहाने सफ़र में आज से मैं भी आपके साथ हूँ ,,,चलो मिलकर चलते है .....!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत पसन्द आया
    हमें भी पढवाने के लिये हार्दिक धन्यवाद
    बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..

    उत्तर देंहटाएं
  3. देखो कितने सारे दिल बिखरे है फर्श पर
    जो कभी एक ही हुआ करते थे .

    वाह ...बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं

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