9 जून 2010

जिन्दा हूँ ...

अय सितमगर तुने दिल तोडा कुछ ऐसे

वजूद मेरा कतरा कतरा बन बिखर गया ,

फिर भी हर कतरेमें जान अभी बाकी है ,

पूछ रहा है मुझे क्यों जिन्दा हूँ मैं ...

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी कविताओं का अंदाजे बंया अच्‍छा लगा। शुभकामनाएंhttp://gullakapni.blogspot.com गुलमोहर

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  2. दिल टूट गया मगर हर कतरे में जान अभी बाकी है ...
    सुन्दर ..

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