1 जून 2010

इंतज़ार कब तलक

उबलती धुपमें बादलोंके पानी में

चायपत्ती और चाशनी के घुलने का इंतज़ार है ,

बालकनी पड़ी वो खाली बेंतकी कुर्सी पर बैठ

वो बारिश की रिमज़िम का इंतज़ार है ....

चाय की वो चुस्की और पकोड़े का सामान भी तैयार है ....

अय बारिश तेरा ही इंतज़ार है ...

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