31 मई 2010

मेरे सिरहाने मेरा साथी

गर्मीकी छोटी सी रात हो सर्दीकी कपकपाती हुई लम्बी रातें ,

सारे मेरे राज़ ए दिल जानता है वो मेरी रातोंका हमसफ़र .....

मेरी पलकोंके देखे अनदेखे सारे सपने का गवाह है वह ,

मेरे गिने हुए सारे तारोंका एक लम्बा सा हिसाब है वह ....

मेरी बोजिल आँखोंमें नींद बनकर आता है हर रात वह ,

मेरी झुल्फोंको एक मात्र आसरा है वह .......

मैंने छुपाये सारे गम अपने इस दुनियासे पर वो सब जानता है वह ,

क्योंकि जब वह बहे थे अश्क बनकर खुदको उस की धारामें भिगोता था वह .....

आइये आज इनका तार्रुफ़ आपसे करवा दूँ आज ,

हर रात मेरे इंतज़ारमें जागकर मुझे सुलाता है जो ,

मेरी रातों का हमसफ़र तकिया है वह ........

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