30 मई 2010

बूंद

एक हरा पत्ता बैठा था कोमलसी शाख पर ,

एक बूंद गिरी उस पर ,

वो कुम्हला गया ,

वो सुख गया ,

क्यों ?

वो बूंद मेरे अश्ककी थी ,

जब वादा करके भी तुम ना आये ....

2 टिप्‍पणियां:

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...