16 अप्रैल 2010

दर्दे दिल ...

वाह !!!

जुड़ जाती है किस्मत किसीकी किसीकी जिंदगी के अंतसे भी

ये जाना हमने जब सुनी कहानी एक अँधेरे की

जब रोशनी का आलम समेटता है दामन खुदका

उसकी जिंदगीकी इब्तदा हो जाती है .....

खामोश है ये अँधेरा

जुबां पर कभी ना गिले है कोई ना कोई शिकवे .....

पर उसके कान खूब तेज पाए है हमने ...

हर आह्ट को बखूबी उजागर करते है बड़ी ख़ामोशीसे ....

शोरगुलसे बड़ा है परहेज इन अधेरों को

उसकी पनाहमें दर्द भी खुलकर पल जाते है ...

उसकी पनाहमें आंसू भी मुस्कुराना सीख जाते है ....

शायद उसे भी तलाश है किसीकी सदियोंसे

कहीं वो उजाले की छुपी हुई किरन तो नहीं ????

1 टिप्पणी:

  1. शायद उसे भी तलाश है किसीकी सदियोंसे

    कहीं वो उजाले की छुपी हुई किरन तो नहीं ????

    wow !!!!!!!!!


    bahut khub

    shkhar kumawat

    http://kavyawani.blogspot.com/

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