13 फ़रवरी 2010

वेलेंटाइन सफारी ...

दिल टुटा था हमारा बड़ी जोर से ,

कई टुकड़े हो गए तो हम आज उनसे रूठकर एक जंगलमें चले गए ......

प्रवेशद्वार पर लिखा था इंसान को देख हम भी मना रहे है वेलेंटाइन दिवस ....

गम अपना भूलकर जंगलमें घुमने लगी मैं ...

पहले मिली मुझे शेरनी हाथमें मोबाइल लिए ,

कॉलरट्यून पर बज रही थी धुन एक :

तेरे बिना तेरे बिना मुश्किल है मेरा जीना ...

हम थोड़े चकराए शेरके मोबाइल को चेक किये

शेरनी के लिए रिंग ट्यून ये मिला :

क्यूँ पैसा पैसा करती है ,क्यों पैसे पे तु मरती है ?

हिरन हिरनी के लिए ऍफ़ एम् पर बजा रहा था :

जाने जा ढूँढता फिर रहा हूँ तुम्हे रात दिन ...

और प्रेमसे पीड़ित एक हाथी सुन रहा था एम् पि ३ पर :

तड़प तड़पके इस दिल से आह निकलती रही ,मुझको क्या सजा मिली ऐसा क्या गुनाह किया ?

एक कबूतरी नाच रही थी कबूतर के साथ गाते हुए :

काँटोंसे खिंचके ये आँचल ,छोड़ के बंधन बाँधी पायल ...

जंगली भैंस तालमें स्वीमिंग फरमा रही थी और अपने आंसू तालमें उंडेल रही थी :

अरे क्या करूँ राम मुझे बुढ्ढा मिल गया ....!!!

मुझे आश्चर्य तब हुआ जब मैंने चीते के साथ एक मेमने को देखा ,

दोनों हाथों में हाथ लिए इश्क फरमा रहे थे और ये गा रहे थे :

मेरे हाथ में तेरा हाथ है ,सारी जन्नते मेरे साथ है ....

एक हिरनी जंगल के राजा को दिल दे बैठी और गा रही प्रेम के गीत यूँ :

तुझे देखा तो ये जाना सनम प्यार होता है दीवाना सनम .....

एक टेडी बेर लेप टॉप खोल कर बैठा था और बेरी को कह रहा था :

ये दूरियां ये राहो की दूरियाँ निगाहोंकी दूरियाँ ....

अचरज आज इस बात का हुआ ,

सब जानवरोंने उपवास किया था ,

प्यार था उनको जिससे उसे कैसे खा सकते है ?

आज के दिन तो प्रेम के गीत गाकर मना सकते है !!!!

जो ना समजा सका एक इंसान वो जानवर भी समजा गया ,

प्यार का नूर उसे किसी का खुदा बना गया ......

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