17 जनवरी 2010

लिख ना पाए तक़दीर ....

आज तक़दीरने मेरे हाथोंमें कलम दवात थमा दी

कहा लिख ले अपनी किस्मत खुद ही खुद को आजमाकर ,

लिखती गयी मिटाती गयी ,

कागज़ कोरा ही कर दिया फिर सुपुर्द उसके ,

गर जान लुंगी खुद तक़दीर तो जीने का मज़ा खत्म हो जाएगा ,

तु लिखती जा मुझे बिन बताये जो भी लिख सके.....

कुछ तु अजमा ले हमको कुछ हम तुम्हे भी आजमाएंगे ....

3 टिप्‍पणियां:

  1. mera jeewan kora kagaz....shayad taqdeer ko us bhagwan ke bhrose hi chhodna theek hai ,hum chah kar bhi likh nhi sakte!

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  2. waah ,,,,bahut hi sundar baat kahi hai agar jan lenge to jeene ka mazaa hi khatm ho jayega .

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