25 दिसंबर 2009

गुफ्तगू ...

फासला हो चुका है दरम्यां

मिलनकी ख्वाहिश लिए

मनको भी उड़ानोंकी उम्मीद

पर ....

आप आसमां और हम जमीं

मिलने की जुत्सजू दफ़न कर चले

क्योंकि डरता है दिल ऊंचाईसे

हरदम गहराई वहीं तनहाई है

और गुफ्तगू करने हमसे सिर्फ़ एक ख़ामोशी है ......

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