22 दिसंबर 2009

तुम्हारी हर बात पर ...

बहुत गहराई है तुम्हारी हर बातमें ,

तुम्हारी आंखोंके नशेमें डूब जाता हूँ ,

तैरकर पार नहीं आना मुझे ,

इसीलिए हर बात अनसुनी किए जाता हूँ ....

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कुछ कहने के लिए नहीं बचा अब की ,

बस हम खामोशसे लौट आए ,

दोबारा मिलने पर बातें ख़त्म न हो पाई ,

हिजरमें पुरी रात जो बितायी थी तेरे खयालमें ......

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बेवफा कहकर ठुकरा दिया था जिन्हें ,

आज उनके दिल को चीरकर देखा तो मेरा नाम ही था .....

अफ़सोस उनको गंवाने का नहीं हुआ

अब जाकर प्यार क्या है समज आया ....

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