17 दिसंबर 2009

शायद ....या ....


चलो आज इस लम्हों पर

कुछ मिटटी डाल दे ...

इसे यहाँ पर छोड़कर

कदमोंको आगे की राहों पर ले चले .....

याद बनाकर इन लम्हों को साथ नहीं ले जाना है

मिलेंगे यहीं गर मुड़कर वापस आए इसी राहो पर कल ,

इस मिटटी के नीचे

शायद ये ऐसे ही मिल जाए !!!

या बारिशमें नम जमीं पर एक पौधा बन निकल आए !!!!

शायद यहाँ एक दरख़्त का रूप ले ले

और उस पर हमें पंछियोंके घरौंदे नजर आए !!!!!!

या फ़िर वक्त की आंधियां

मिटटी के साथ इन्हे भी अपने साथ दूर कहीं उडा जाए !!!!!

पर जहाँ पर भी ठहरा होगा वह लम्हा

जिंदगी के सफे पर मेरा नाम लिखकर मेरे इंतज़ारमें होगा !!!!!!

3 टिप्‍पणियां:

  1. पर जहाँ पर भी ठहरा होगा वह लम्हा

    जिंदगी के सफे पर मेरा नाम लिखकर मेरे इंतज़ारमें होगा
    kitani khubsurat ba keh di,un lamho par nayi umeedein nazar aati hai paudhe ke roop mein,dil ko chuti kavita,bahut badhai.

    उत्तर देंहटाएं
  2. hummmmmmm jindgi ka sabse bada sach mitti hi to hai....jeena yha marna yha iske siwa jana kaha....


    Jai ho Mangalmay ho

    उत्तर देंहटाएं

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...