23 अक्तूबर 2009

जहेमत

फुर्सत मिलती है फुरकत के लम्होंमें ,

तुम्हे पल भरके लिए रूबरू मिलने आते है ख्यालोंमें ....

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वक्तको जकडा मुठ्ठीमें ,

पसीनेसे तर वो हथेलीमें चिपक गया ,

लम्हे होते वो मीठी यादोंके तो अच्छा था ,

नामाकुल ये तो वो निकले जिनसे मैं हरदम भागता था .....

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जुबानको कुछ कहने की जहेमत दे दो ,

आँखों पर पलकोंकी चिलमन ढककर ....

3 टिप्‍पणियां:

  1. वक्तको जकडा मुठ्ठीमें ,

    पसीनेसे तर वो हथेलीमें चिपक गया ,

    लम्हे होते वो मीठी यादोंके तो अच्छा था ,

    नामाकुल ये तो वो निकले जिनसे मैं हरदम भागता था
    waah lajawab

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