29 सितंबर 2009

सपना मेरा कल वाला

कल विजयादशमी थी ..दोपहरमें कुछ ज्यादा ही फाफडा और जलेबी खाकर लेटी नींद आ गई ...दिन की नींद थी तो पक्की नहीं थी और मैं सपने में स्वर्गमें पहुँची ...अभी तो दरवाजे पर ही थी और क्या देखती हूँ ? रावण चित्रगुप्तसे कह रहे थे चलो मुझे इतने युगों से इधर हूँ तो कुछ टहलने के लिए पृथ्वी पर मुझे जाने दो ...अब तो मेरे पाप भी धूल गए है ....

चित्रगुप्त खुश हुए । उन्होंने इजाजत भी दी ..पर कहा तुम्हारी दैवी शक्ति है न वो काम नहीं आएगी और तुम्हे अपने दस सर लेकर ही जाना पड़ेगा ....

रावणका तो पुरा गेट अप ही बदल गया ...जनाब पृथ्वी पर आए ...दस माथे पर बीस आँखे और उस पर दस गोगल्स .....हर सर पर एक से बढ़कर एक टोपी ...

अब देखो क्या होता है >>>...........

सीधे मुंबई पहुंचे ...मोह नगरी के बारे में बहुत सुना था ....

लोग हैरानी से देखते है ..और चल देते है ...बस उनके पास वक्त नहीं था ..लोकल ट्रेन में जाना चाहते है पर सर आडे आ रहे है ...लोग सर को मार रहे है ...ट्रेन में जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता ...

भूख लगी खाने पहुंचे एक रेस्तोरांमें ....हर देश की आइटम थी ...एक मुंह ने पंजाबी माँगा एक ने गुजराती ,एक ने चाईनीज़ तो एक ने थाई ...जब दस मुंह से सब एक पेट में जमा हुआ तो क्या हश्र हुआ होगा सोचो ...रावणके शरीर में महाभारत ....!!!!!!

डॉक्टरके पास जाना पड़ा ...डॉक्टरने दस जीभ ,दस कान ,दस गले चेक करने के दस गुने रुपये फीसमें वसूल किए ..दस मुंह से दस अलग अलग दवाई भोजन अनुसार लेनी पड़ी ...पर वहां उनकी दोस्ती एक नर्स से हुई ...वहां से जब वे बहार निकले तो हाथ पकड़ कर रोड क्रॉस कैसे किया होगा सोचो ........

एक मल्टीप्लेक्स में फ़िल्म देखने गए तो दस सीटें रुक रही थी तो दस टिकेट खरीदने पड़े ...सोचा चलो अब होटल ताज में रूम ले लूँ ....इतने थक गए थे की सीधे पड़े बिस्तरमें ...पर नींद नहीं आ रही थी .....अब इनका प्रॉब्लम क्या था बता दूँ ?????? ये हमारी तरह गा भी नहीं सकते थे की

" करवटें बदलते रहे सारी रात हम ...." समजें आप ....

सबके हाथ में मोबाइल देखकर ताज्जुब हुआ ....दसो सर ने अलग अलग माँगा ...अब हमारी इंडियन हिरोइन के मोबाइल चित्रगुप्त की सहायता से लगाये ...एक की बात दूसरी सुन रही थी .....थक गए परेशां हो गए ...... और फ़िर मोबाइल कंपनी का बिल डेली बेसिस पर माँगा था तो बैलेंस एक घंटे में ख़तम ....दसो को मरीन ड्राइव पर जाकर समुन्दर में फेंक दिया ....रस्ते में चलते हुए कितनी ही महिला थप्पड़ मार रही थी ....एक महीने की वेकेशन पर आए रावण प्लेन में बैठकर देल्ही जाना चाहते थे ... राजकारणीओ के बारे में खूब सुना था ...एक ब्यूटी पार्लर में गए ...दस सर की अलग अलग हेर स्टाइल और दस गुना बिल !!!!!! प्लेनमें फ़िर दस सिट रोकी तो दस गुना भाडा ... फ़िर टीवी पर इंटरव्यू रखा गया एक नए नवेले अजूबा जैसे व्यक्ति का ...इंटरव्यू ले रही थी पाखी ....वो इतनी प्रभावित हुई की उसने अपने मंगेतर को तुंरत रिजेक्ट कर दिया और इन्हे प्रोपोस कर दिया ...अब रावण तो स्वर्ग लोक में भी चेनल देखते थे ...तुंरत भागे और चित्रगुप्त को प्रार्थना करके फ़िर वापस लौट गए स्वर्ग में फ़िर से .....

मैं रोकने गई उन्हें तो पलंग से गिर पड़ी और मेरा सपना टूट गया ......

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...