28 सितंबर 2009

बस यूँही ...

अक्ससे हाथ मिलाने जाते है ,

आयना हमें छू जाता है ....

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जर्रा एक जमीं का उडान भर रहा है ,

आसमान को भर रहा है ……

हाथ बढ़ा कर छू लेने को दिल करा ,

और हवा के पंख लगा कर उड़ जाता है ....

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