7 अगस्त 2009

खयालों के बारे में एक ख़याल

जब ख़याल कुछ पक जाते है ,

कुछ खुशबू छोड़ने लगते है ,

इजाजत चाहते है किसीके नजर होने की ,

किसीकी ख्वाहिशमें पलने की जुत्सजू चाहते है .........

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जिसकी जुत्सजू करते रहे थे हम खयालोंमें

उनके दीदार पर दिल संभल न पाया हमारा ,

इजहार करने का मौका तो पा लिया था फ़िर भी ,

खामोश लबों से अफसाना बयां न हो पाया ......

1 टिप्पणी:

  1. wahhh ustad wahh kya baat hai..bahut gahri baat kah gyi aap ...ki jab khyal kuch pak jate hai.....

    swagat hai .......

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