18 अगस्त 2009

दही मक्खन

एक दूधभरे गिलासकी तरह है जिंदगी ,

कभी खटासका छींटा पड़ जाने से फट जाती है

ये पानी और गठ्ठेसी अलग हो जाती है ....

एक छोटेसे चम्मचभर जामन मिला लो ,

लिपट जाता है जर्रा जर्रा दहीं बनकर

और देखो कैसे जम जाती है जिंदगी !!!

मीठी रगोंको उसकी फीकी खटास जच जाती है ......

पानीकी धारोंके संग मथने लगती है जब

मक्खन को जनम दे जाती है ,

आग पर उबलकर घृत के चोलेमें

रेशमसा स्निग्ध रूप धर जाती है जिंदगी .......

जिंदगीसे खेलते रहे हम यूँ हर लम्हे ,

एक सीधीसे जिंदगीको बस यूँही छेड़ते रहे हम .............

2 टिप्‍पणियां:

  1. waah.........adbhut.........sach zindagi ko bahut hi sundar dhang se prastut kiya hai aapne.

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  2. एक छोटेसे चम्मचभर जामन मिला लो ,

    लिपट जाता है जर्रा जर्रा दहीं बनकर

    और देखो कैसे जम जाती है जिंदगी !!!

    waah zindagi ka ye rang bhi bahut sunder raha.bahut khub

    उत्तर देंहटाएं

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